परिस्थितियों मे बदलाव को देखते हुए भारत में खाद्य तेलों की मासिक खपत घटकर 14 से 15 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।पाम तेल का उत्पादन इंडोनेशिया- मलेशिया में बढ़ेगा और खपत में कमीआएगी वहीं दूसरी और क्रूड तेल की घोर मंदी ने बायो डीजल के कार्यक्रम को गड़बड़ा दिया है।

लॉकडाउन के दौरान बड़ी मात्रा में उपभोक्ताओं ने खाद्य तेल का स्टॉक कर लिया है।आने वाले महीनों में अभी शादी- समारोह भी नहीं होंगे और गर्मी में खाद्य तेलों की खपत में स्वाभाविक रूप से गिरावट आती है।अप्रैल में 7।90 लाख टन, मार्च में 9।40 लाख टन खाद्य तेल काआयात किया गया है।मई में 8  लाख टन के आसपास आयात काअनुमान लगाया जा रहा है। बेरोजरागी बढ़ने से भी खपत में गिरावटआना संभव है।

इसका असर इस बात से भी लगाया जा सकता है की लॉकडाउन से होटल, रेस्टोरेंट, गली-मोहल्ले की छोटी-बड़ी भजिए, समोसे, आलूबड़ेआदि बेचने वाली दुकानें बंद हैं।गर्मी में खाद्य तेल की खपत कम होती है और दीपावली पूर्व विवाह समारोह भी नहीं है व मजदुर भी रोजगार छोड़ कर गांव की ओर चले गए हैं। कई दशकों बाद बेरोजगारी चरम सीमा पर होगी। ऐसी स्थिति में आने वाले महीनों में खाद्य तेलों की खपत घटकर 14 से 15 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।लॉकडाउन के कुछ माह पूर्व तक खाद्य तेलों की मासिक खपतऔसत रूप से 18-19 लाख टन की मानी जाती रही थी। एक अनुमान के अनुसार प्रति माह 4 लाख टन की खपत में गिरावटआएगी।

60 से 65 प्रतिशतआयात

भावकुल खपत का 60 से 65  प्रतिशत खाद्य तेलों का आयात करता है। शेष आपूर्ति देशी खाद्य तेलों से होती है। भारत के आयातकों को विशेष परेशानी नहीं होगी। सोया तेल अर्जेंटीना से एवं पाम तेल इंडोनेशिया से आयात कर लिया जाएगा। हालांकि पिछले वर्षों में मलेशिया से सर्वाधिक मात्रा में पाम तेल का आयात होता था किंतु कश्मीर मुद्दे पर मलेशिया की टिप्पणी से संबंधों में दरार पड़ गई और केंद्र सरकार ने रिफाइन पाम तेल का आयात पर मिट के माध्यम से कर दिया।

इससे मलेशिया से आयात  लगातार घटता जा रहा है। यह उल्लेखनीय है की पाम का उपयोग, होटल, हलवाई, नमकीन निर्माता, बेकरी उद्योग आदि अधिक मात्रा में करते हैं।सस्ता होने से दक्षिण भारत में मिलावट में भी जा रहा था।पिछले 54-55 दिन से होटल, रेस्टारेंट, नमकीन उद्योग बंद हैं।अत: आयात में कमी का प्रभाव भावों पर किसी प्रकार का नहीं पड़ रहा है।सस्ता होने के बावजूद मांग कम है।

बड़ी मात्रा में स्टॉक

जानकारों और विशेषज्ञों के अनुसार लोकडाउन में अनेक परिवारों ने बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का स्टॉक कर लिया है।इस वजह से भीआने वाले दिनों में मांग कमजोर रहेगी हालाँकि सोया-सनफ्लावर तेल में मांग रहेगी। अप्रैल माह में सीपीओ 3।55 लाख टन एवं 30 हजार टन आरबीडी, 1।84 लाख टन सोयाऔर 2।21 लाख टन सनफ्लावर का आयात हुआ है।इस माह में कनौला तेल का आयात नहीं किया गया।अत: कुल आयात 7।90 लाख टन हुआ है।

मार्च में 9।40 लाख टन,मई माह में 8 लाख टन खाद्य तेल केआयात की संभावना व्यक्त की जा रही है। किसानों एवं नैफेड के पास खरीफ मूंगफली की फसल है।गुजरात में अगले सप्ताह कुछ मंडियां खुल सकती है।इससे मूंगफली आवक बढ़ने लगेगी।आवक बढ़ने पर तेल मिलों की मांग कैसी रहेगी, यह भी विचारणीय है।

पाम तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी 

इंडोनेशिया एवं मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन बढ़ना लगभग तय है।इसकेअलावा बायो डीजल का प्रोग्राम भी गड़बड़ा गया है।क्रूड तेल के भावों की मंदी से इन दोनों देशों की आर्थिक हालात आज नहीं तो कल खराब हो जाएगी।पाम का फल पेड़ों से तोड़ कर निकाला जाता है। प्रतिवर्ष पेड़ फल देते ही हैं। इन फलों का त्वरित उपयोग नहीं किया तो खराब हो जाते हैं।जहां तक उत्पादन का सवाल है, पेड़ों को खाद एवं पानी पर्याप्त मात्रा में दिया जाता है, तब उत्पादनअधिक होता है, इनका उपयोग कम होने या नहीं होने पर पेड़ों पर फल कम लगते हैं।इससे पाम तेल की उत्पादन लागत कम बैठ जाती है। इस वर्ष पाम तेल का उत्पादन अधिक होगा जिससे भाव घट सकते हैं।  

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