10 Mindboggling Written pieces by Rahat Indori

Rahat Indori Urdu ke khyaat jaane maane rachiyeta hai jinhe introduction ki koi jarurat nahi hai. Rahat Indori ji ne aise nagme likhe hai, jinhe padhne par aap barbas hi unke deewaane ho jaate hai. Unki likhi shayari aur Ghazalo ne Hindi cinema me bhi khyati paayi hai jaha unhone bataur lyricist kaam kiya hai. Rahat ji ne unke pehli kavita 19 saal ki umar me likhi thi aur fir tabse unhone peeche mud kar nahi dekha. Indore HD unhe unke likhe har nagme ke liye salaam karta hai aur aapko unke 10 behtareen nazme pesh karta hai.

लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।

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कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते  हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं
ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं।

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सरहदों पर तनाव हे क्या
ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या
शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं
गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं|

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रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता हैं
उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं|

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सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान  रहे
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे|

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बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा
चोर उचक्कों की करो कद्र, की मालूम नहीं
कौन, कब, कौन सी  सरकार में आ जाएगा|

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मौसमो का ख़याल रखा करो
कुछ लहू मैं उबाल रखा करो
लाख सूरज से दोस्ताना हो
चंद जुगनू भी पाल रखा करो|

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अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया|

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अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ,
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ,
फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया,
ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।

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ये सहारा जो नहीं हो तो परेशां हो जाएं
मुश्किलें जान ही ले लें अगर आसां हो जाएं
ये जो कुछ लोग फरिश्तों से बने फिरते हैं
मेरे हत्थे कभी चढ़ जाएं तो इन्सां हो जाएं |

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